Sunday, April 8, 2012

नरेंद्र मोदी, डा. सुब्रमण्यम स्वामी और बाबा रामदेव


डा स्वामी मोदी और रामदेव में आपको चुनने को कहा जाए तो आप किसे चुनेंगे ?
इस लेख में इन्ही तीनो की सापेक्ष योग्यता पर हम चर्चा करेंगे | क्यों की हमें नतीजो से मतलब होता हैं |
सरकार गिरने की संभावनाए लगने जा रही हैं | नरेन्द्र मोदी जी की सद्भावना कार्यक्रम योजना का हिस्सा थी | पर वे तुष्टिकरण की निति पर ना थे ना होंगे | अपनी प्रसाशनिक क्षमताओ की वजह से प्रधानमंत्री पद के सर्वोच्च दावेदार हैं | अविवाहित हैं और कार्य शैली भिन्न हैं | मुस्लिमो को डर हैं के मोदी ना जाए उधर बाबा समर्थक कहते हैं के दंगा पीडितो को बहुत मदद करने वाले मोदी हैं | मैं कहता हू की फिलिस्तीन को सबसे ज्यादा मदद करने वाले २ देश हैं और वो हैं प्रथम इस्राएल और द्वतीय सयुक्त राज्य अमेरिका | यही निति होती हैं | जान का नुक्सान ही नुक्सान होता हैं माल तो फिर अर्थ से बना लिया जाता हैं | इसलिए मोदी एक जाचा परखा नेता हैं जिसका वर्तमान में विकल्प नहीं हैं |



फिर डा सुब्रमण्यम स्वामी पर आते हैं | हॉवर्ड में गेस्ट लेक्चर लेते थे आई आई टी में प्रोफसर थे | अब जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं और सोनिया की कांग्रेस की ऐसी तैसी कर रहे हैं | ये वही स्वामी हैं जिन्होंने अटल बिहारी वाजपई की सरकार गिरवाई थी और ये वही स्वामी हैं जिन्होंने सोनिया को प्रधान मंत्री नहीं बनाने दिया | एक साक्षात्कार में इन्होने बताया के सोनिया गांधी का राजीव गाँधी के हत्यारों को माफ करने के लिए राष्ट्रपति से याचिका की थी और इसी बात से वे नाराज हैं | बात भी सही हैं दुनिया की कौन औरत होगी जो अपने पति के कातिलों को माफ कर देगी | अब यहाँ हमें देखना होगा औरत कौन हैं इतिहास क्या हैं | १९९१ में सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी का रिश्ता तलाक करीब था जब राजीव गाँधी की हत्या हुई | समय भी वहा था जब आई पी के एफ के जवान तैनात थे और प्रभाकरन के माध्यम से एल.टी.टी.इ में धर्मान्तरण हो रहा था | वर्ड क्रिस्टियन कौंसिल काफी पैसा खर्च कर रहे थे इस काम में | तभी एल.टी.टी.इ अचानक बेवजह के इल्जाम के लिए राजीव गाँधी को मार देती हैं | सम्भावना तो ये हैं के इसाइयो के संगठन की भारत में सेंधमारी की उम्मीद खत्म सि होती नजर आ रही थी सो पेच ही खत्म कर दिया और सोनिया सर्वे सर्व हो गई | राजीव गाँधी इतने भ्रष्ट लोगो की लिस्ट छोड के गया हैं और पैसा भी के कांग्रेसी तो सोनिया के जुते के नीचे आयेगे ही | दबाव बनाने के लिए गोटे थी उनके पास | ५-६ साल राजनीती सीखी सोनिया ने, अब हाई स्कूल फ़ैल के ली ये जरुरी हैं | पर समय से बलवान क्या हैं एन डी ए के आते ही पूरा मिसनरी कुनबा सतर्क हो गया और आथा पैसा लगा के कांग्रेस गठबंधन यु.पी.ए को ले आया |
सोनिया तकनिकी कारणों से प्रधान मंत्री नहीं बन पाई | धन्यवाद जाता हैं डा स्वामी को , उन्होंने उसी साल यानी २००४ में चंद्र शेखर और जोर्ज फेर्नादिस के साथ मिल कर “राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच” की स्थापना की यु.पी.ए की नीतियों का विरोध करने को | बाद में(२००७) ये सब उन्होंने बाबा रामदेव को दे दिया कार्यभार | गौर करने वाली बात ये हैं के बाबा रामदेव को उठाने वाले मुलायम सिंह हैं | पर अगर डा. स्वामी बाबा को ना लगते इन कामो में तो समाजवाद का प्रचार कर रहे होते बाबा | यद्दपि उन्होंने अपने साक्षात्कर में स्वीकार किया के वे बाबा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं | पर राजनितिक विश्लेषक तो ये बहुत बेहतर समझते हैं के डा स्वामी कितनी ऊची चीज़ हैं | उनके कुशाग्र बुद्धि और स्पष्ट वक्तव्यों का मैं भी प्रशंशक हू और मानता हू के आने वाली भारत सरकार में वे उच्च पद के अधिकारी हैं |
आज बड़े स्तर पर हिंदू वादी और कांग्रेस विरोधी बाबा रामदेव से जुड रहे हैं | बाबा के स्वदेशी के चक्कर में अपना इस्लामीकरण, लव जिहाद, इसीकारण के विरुद्ध कार्य करना उन्हें दिख नहीं रहा | राष्ट्र पर दसो संकट हैं किसी एक के भरोसे ना रहिये | जहा समर्थन चाहिए दीजिए उन्हें पर अपना मुख्य काम क्यों छोड रहे हैं | बाबा अगर हिंदू मुस्लिम एकता की बात कर रहे हैं आप क्यों फस रहे हैं चक्कर में | देखिये बाबा जी का कोई वजूद नहीं हैं वो आज यहाँ कल वहा वाले हैं | प्रमाण हैं उनके साहसिक कार्य, हरिद्वार में ज़मीन हथियाने में किये गए भ्रष्टाचार | भाई राजीव दीक्षित की मौत पर मीडिया में ना दिया गया एक भी बयां | और खुद अपने ही गुरु के आश्रम पर कब्ज़ा कर के गुरु को गायब करवा देना |







मीडिया बिकी हुई हैं पर जो लाइ हैं वो सच हैं | बाबा व्यक्तिगत तौर पर मुलायम सिंह यादव के ही साथ के भाई हैं | शिवपाल सिंह को जानते हैं ना मुलायम सिंह के भाई बस बाबा भी उन्ही के पदचिन्हों वाले हैं | कोई भगवा पहनने से सन्यासी नहीं हो जाता ज्ञान और आचरण से होता हैं | बाबा खाप पंचायतो का समर्थन करने लग गए इन्हें खुद गोत्र का अर्थ नहीं पता सिर्फ जातो के वोट के लिए | खुद को आर्य कहलाने वाले बाबा शिव लिंग पर जल चढाते हैं मूर्तीयो पर माला पहनाते हैं | यानी इनका वैचारिक कोई वजूद नहीं आप चाहे कोई भी हो पर ये मानेंगे के व्यक्ति में सैधांतिक स्थिरता होनी चाहिए | हठ योग विशेष परिस्तिथियों के लिए ही हैं पर बाबा उसी का प्रचार कर रहे हैं ठीक हैं राजनितिक महत्वकंछा  होना भी बुरा नहीं | पर राजनैतिक वैचारिक स्थिरता के साथ | अब अगर बाबा राम भक्तो के हत्यारे मुलायम सिंह का साथ देंगे तो आप भूल जाइये के बाबा इस्लामीकरण या इसाईकारण रोकने की हिम्मत करेंगे | सपा को तो संभवतः पैसा मिलता हैं अरब देशो से मुसलमानों के लिए ऐसे ही नहीं ये कौम से गद्दारी कर रहे हैं | पर बाबा शुरू में किये गए एहसान उतार रहे हैं या अपनी जाती का साथ निभा रहे हैं ये तो वो ही जाने | 

सन्यासी की कोई जात नहीं होती, वह निर्भीक सिर्फ राष्ट्र समाज और धर्म का उत्थान सोचता हैं ना ही सन्यासी एक जगह रुकता हैं और ना ही कोई डेरा जमाता हैं | अरे मठो को छोड कर तो लोंग सन्यास लेते हैं सन्यास लेकर मठ नहीं बनाते | तो आप से यही अनुरोध हैं के बाबा रामदेव सिर्फ कार्टून हैं जिसका डा स्वामी जैसे विद्वान इस्तेमाल कर रहे हैं जो एक दम सही हैं अंध भक्ति मत करिये | आपको भी यही करना चाहिए, स्वदेशी बोलकर वो तो अपना सामन बेच रहा हैं | उसके चक्कर में आप मूल मुद्दे ना भूल जाए जो राष्ट्र की मुस्लिम और ईसाइयो से रक्षा का हैं | बाकी किसी पद की योग्यता नहीं, पर आप ठहरे बाबा भक्त आप भक्ति से राजनीती देखेंगे और मुझे गलिया देना चालु कर देंगे तो देश तो चौपट होगा ही | जीतने वाले घोड़े पर दाव लगाना चाहिए भाइयो गधो पर नहीं उनसे तो सिर्फ माल ढुलाई की जाती हैं वही आप भी करिये अन्यथा कुछ समय बाद जोश ठंडा हो जाएगा और ना हिंदुत्व(वेद) का कार्य कर पाएँगे ना राष्ट्र का |

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